नन्हे कलाकारों ने मंच पर जीवंत की कल्पना, संवेदना और अभिनय की अद्भुत दुनिया
लखनऊ।
शहर में बाल रंगमंच और रचनात्मक अभिव्यक्ति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते हुए डोरेमी क्लब द्वारा आयोजित “द वॉयेज — बाल रंगमंच सीज़न 4” का भव्य समापन हुआ। पंद्रह दिनों तक चले इस विशेष थिएटर वर्कशॉप एवं प्रदर्शन कार्यक्रम में बच्चों ने अभिनय, संवाद, अभिव्यक्ति और मंच कौशल का शानदार प्रदर्शन कर दर्शकों का दिल जीत लिया।
लखनऊ के प्रतिष्ठित ला मार्टिनियर कॉलेज में आयोजित इस कार्यशाला में 4 से 14 वर्ष तक के बच्चों ने भाग लिया। गहन प्रशिक्षण और रचनात्मक अभ्यास के बाद युवा कलाकारों ने निशातगंज स्थित कैफी आज़मी अकादमी के मंच पर प्रभावशाली प्रस्तुतियां दीं, जिन्हें दर्शकों और अभिभावकों ने खूब सराहा।
कार्यशाला का संकलन मनुकृति पाहवा एवं मयंक पाहवा द्वारा किया गया, जबकि कार्यक्रम का आयोजन कोपल प्रोडक्शंस के सहयोग से किया गया। इस पहल का उद्देश्य बच्चों में आत्मविश्वास, रचनात्मक सोच और अभिव्यक्ति की क्षमता को विकसित करना था।
“द ओडिसी” बनी आकर्षण का केंद्र

समापन समारोह की मुख्य प्रस्तुति “द ओडिसी” रही, जो होमर के प्रसिद्ध महाकाव्य पर आधारित एक प्रभावशाली नाट्य मंचन था। सुविख्यात रंगमंच निर्देशक जया विर्ली के निर्देशन और विशाल कसाना के सहायक निर्देशन में प्रस्तुत इस नाटक ने साहस, संघर्ष और घर-वापसी की भावनाओं को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से मंच पर प्रस्तुत किया। छोटी उम्र के बच्चों द्वारा प्रदर्शित भावनात्मक अभिव्यक्ति और मंचीय आत्मविश्वास ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
लघु नाटकों ने भी जीता दर्शकों का दिल
कार्यक्रम में प्रस्तुत “प्लैनेट उल्टा-पुल्टा” और “टुमारो फ़ॉरेस्ट” नामक लघु नाटकों ने भी खूब सराहना बटोरी। अपूर्व शाह द्वारा लिखित एवं निर्देशित इन प्रस्तुतियों में अभिषेक सिंह सहायक निर्देशक रहे। “प्लैनेट उल्टा-पुल्टा” ने अपनी मनोरंजक और कल्पनाशील कहानी से दर्शकों को हंसने पर मजबूर किया, जबकि “टुमारो फ़ॉरेस्ट” ने प्रकृति संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी का संवेदनशील संदेश दिया।
मुख्य अतिथि ने बढ़ाया उत्साह
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में ला मार्टिनियर कॉलेज के प्रिंसिपल गैरी डॉमिनिक एवरेट उपस्थित रहे। उन्होंने बच्चों की प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि रंगमंच बच्चों के व्यक्तित्व विकास, आत्मविश्वास और रचनात्मक सोच को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम है।
संस्थापक साहिबा तुलसी ने साझा किए अनुभव

डोरेमी क्लब की संस्थापक साहिबा तुलसी ने कहा:
“बाल रंगमंच पर आधारित इस तरह की प्रदर्शन-उन्मुख कार्यशालाओं की तैयारी में महीनों की मेहनत लगती है। जब बच्चे आत्मविश्वास के साथ मंच पर प्रस्तुति देते हैं और अभिभावकों के चेहरे पर गर्व दिखाई देता है, वही हमारे प्रयास की सबसे बड़ी सफलता होती है।”
उन्होंने सभी अभिभावकों, प्रशिक्षकों और सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि डोरेमी क्लब आगे भी बच्चों को रचनात्मक मंच उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा। डोरेमी क्लब बाल रंगमंच और प्रदर्शन कलाओं के माध्यम से बच्चों में रचनात्मकता, संवेदनशीलता, आत्मविश्वास और सहयोग की भावना विकसित करने के उद्देश्य से लगातार सक्रिय है।
