आंध्र प्रदेश से जुड़ी एक बड़ी खबर देश की अर्थव्यवस्था और सोना बाजार को लेकर चर्चा में है। कुरनूल जिले के जोन्नागिरी क्षेत्र में देश की पहली बड़े स्तर की प्राइवेट गोल्ड माइनिंग परियोजना शुरू होने जा रही है, जिसे जियोमायसोर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित किया जा रहा है। करीब 598 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस प्रोजेक्ट पर 400 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश हो चुका है और मई के पहले सप्ताह से उत्पादन शुरू होने की संभावना है। अब तक की जांच में इस खदान में 13.1 टन सोने के भंडार की पुष्टि हुई है, जबकि भविष्य में इसके 42.5 टन तक पहुंचने का अनुमान जताया जा रहा है। शुरुआती चरण में यहां से 500 से 750 किलोग्राम सोना सालाना निकलेगा और अगले कुछ वर्षों में यह उत्पादन बढ़कर 1,000 किलोग्राम प्रति वर्ष तक पहुंच सकता है, जिसे लगभग 15 वर्षों तक बनाए रखने की योजना है।
लखनऊ और उत्तर प्रदेश के नजरिए से देखें तो यह परियोजना इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि भारत फिलहाल हर साल 800 टन से ज्यादा सोना विदेशों से आयात करता है। इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव पड़ता है और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है। हालांकि इस नई खदान के शुरू होने के बाद तुरंत आयात में कमी नहीं आएगी, लेकिन लंबे समय में यह भारत की आयात निर्भरता को कम करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है। अभी देश में सोने का घरेलू उत्पादन बेहद सीमित है और कर्नाटक की हुत्ती खदान ही प्रमुख स्रोत मानी जाती है, जहां से हर साल करीब 1500 से 1600 किलोग्राम सोना निकलता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जोन्नागिरी प्रोजेक्ट की सफलता से देश में गोल्ड माइनिंग सेक्टर को नई गति मिलेगी और निजी निवेशकों का रुझान बढ़ेगा। इसके साथ ही अन्य अनछुए गोल्ड और क्रिटिकल मिनरल डिपॉजिट्स की खोज को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में घरेलू गोल्ड प्रोडक्शन को 50 से 100 टन सालाना तक बढ़ाने का हो सकता है, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत कर सके। कुल मिलाकर, यह परियोजना भारत के खनन क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लाने के साथ-साथ भविष्य में आर्थिक मजबूती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
