पंचायतों में कल्याण सिंह मॉडल अपनाये योगी

Spread the love

पंचायत, सदस्य और प्रधान

पंचायतों में कल्याण सिंह मॉडल अपनाये योगी 

लखनऊ।कोरोना संकट काल में त्रिस्तरीय पंचायतों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो गयी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कोरोना काल में भी लगातार दौरे करके जमीनी हक़ीक़त से रूबरू होने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन 24 करोड़ आबादी वाले प्रदेश का   दौरा करके नहीं, सिस्टम को मजबूत करके दूर-दराज ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन स्तर में सुधार लाया जा सकता है। इसके लिए त्रिस्तरीय पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। ग्राम पंचायतों का नए अधिनियम लागू होने के बाद 6वीं वार विधिवत गठन हो गया और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कल नव निर्वाचित प्रधानों से बातचीत करेंगे। नव-निर्वाचित प्रधानों को मुख्यमंत्री बधाई देने के साथ विकास कार्य, कोरोना से लड़ाई आदि सन्देश देंगे। यह अच्छी परम्परा है और इससे नव निर्वाचित प्रधानों का उत्साह भी  बढ़ेगा लेकिन उत्साह बढ़ाने से कार्य नहीं चलेगा। अब पंचायतों को पारदर्शी और जन प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित करना सबसे बड़ी चुनौती है। इस चुनौती को भाजपा के मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह के मॉडल को अपना कर दूर किया जा सकता है।

1994 में 73वे संविधान संशोधन के बाद 1995 में पहली पंचायतों के चुनाव हुए। इस चुनाव में पहली बार 21% अनुसूचित जाति,  27 % पिछड़ी जाति और एक तिहाई पद महिलाओं के लिए आरक्षित किये गए। इसके पीछे मंशा यही थी कि गावं के सर्वागीण विकास में दलितों, पिछड़ों महिलाओं की अधिक से अधिक भागीदारी हो। अधिनियम के तहत त्रिस्तरीय ग्राम पंचायत क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के सभी पदों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गयी और अब तक 19995, 2000, 2005, 2010, 2015 पांच चुनाव हो चुके। कोरोना के कारण 6ठा चुनाव पांच महीना देर से 2021 में हुआ। इन 25 वर्षों में हर चुनाव में 8 लाख से अधिक पंचायत प्रतिनिधी चुने जाते रहे लेकिन यह पंचायत प्रतिनिधी प्रशिक्षण के अभाव में गावं के सर्वागीण विकास में अहम् भूमिका नहीं निभा पाए। 

इसके पीछे सरकार की अव्यवहारिक नीतियां रही है। जितने भी मुख्यमंत्री आये है उनमे से कल्याण सिंह ही ऐसे मुख्यमंत्री है जिन्होंने पंचायतों को मजबूत करने के लिए सत्ता विकेन्द्रीयकरण का अभियान चलाया जो बहुत व्यवहारिक और सफल भी रहा लेकिन कल्याण सिंह के इस पारदर्शी व्यवस्था में नौकरशाहों, कर्मचारियों और भ्रष्ट नौकरशाहों के लूट पर अंकुश लग रहा था जिसे सत्ता बदलने के साथ कल्याण मोडल को ठन्डे बस्ते में डाल दिया गया। कोरोना संकट में पूरी व्यवस्था की कलई खुल गयी है और भ्रष्टाचार उजागर हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अगर कल्याण सिंह के पंचायती मॉडल को लागू करें तो कोरोना जैसी कोई भी महामारी और समस्या का बहुत आसानी से सामना किया जा सकता है। कल्याण सिंह गांव से जुड़े थे इसलिए उनकी सोच  जमीनी रही। कल्याण सिंह के पंचायती मोडल में सीधा और बहुत पारदर्शी व्यवस्था की गयी थी। उन्होंने प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर एक ग्राम सचिवालय क्षेत्र पंचायत स्तर पर क्षेत्र सचिवालय और जिला पंचायत स्तर पर जिला पंचायत सचिवालय के गठन की व्यवस्था की थी।  इसमें प्रत्येक ग्राम सचिवालय में एक बहुउद्देशीय कर्मचारी की नियुक्ति की गयी जो 24 घंटे ग्राम सचिवालय स्थित भवन में रह कर कार्यों का सम्पादन करता। इन ग्राम सचिवालयों को तकनीकी सुविधा नेट, कंप्यूटर, फोन तथा सरकार की प्रत्येक योजनाओं से जुड़े योजनाओं की जानकारी देने के लिए पम्पलेट देने की व्यवस्था थी। इसके पीछे मंशा यही थी कि एक ग्राम पंचायत को एक कर्मचारी मिले जो लगातार गाँव में रहेगा। वह बड़े आसानी तरीके से सर्वागीण विकास में अहम् भूनिका निभा सकता है। ग्राम पंचायत स्तर पर भी केंद्र एवं प्रदेश से जुडी समस्त योजनाओं की जानकारी, उससे लाभ लेने के तरीके और योजनाओं की पात्रता सहित तमाम सूचनाएँ ग्रामीणों को दी जानी थी। ग्राम सचिवालय को लेकर निति स्पष्ट थी जिसमे प्रधान के साथ साथ ग्राम पंचायत के चुने हुए सभी सदस्यों की भागीदारी और उन्हें प्रशिक्षित  किया जाना अनिवार्य था। पंचायत सचिव एवं प्रधान मिलकर सरकारी धन की लूट न कर पाए इसके लिए समिति – नियोजन एवं  विकास समिति, शिक्षा समितिव्, निर्माण कार्य  समिति, स्वास्थ्य एवं कल्याण समिति, प्रशासनिक समिति, जल प्रबंधन समिति शामिल है। 
पारदर्शी व्यवस्था बनाये रखने के लिए ग्राम पंचायत सदस्यों भी महत्व दिए गया इसलिए 3 महत्वपूर्ण समिति निर्माण कार्य समिति, स्वास्थ्य एवं कल्याण समिति  जल प्रबंधन समिति का मुखिया सदस्यों को ही बनाया जाना है। साथ ही सभी वर्गों की बराबर भागीदारी रहे इसके लिए अनुसूचित, पिछड़ी एवं महिला का एक एक सदस्य अनिवार्य किया गया। इस व्यवस्था को लागू होने से पंचायत सदस्यों जिनकी संख्या ग्राम पंचायत की आबादी के अनुसार 6 से 15 होती है सबकी महत्त्व बढ़ गयी। इस व्यवस्था के लागू होने से गाँव के विकास कार्य, कल्याणकारी योजनाओ में भ्रष्टाचार लगभग शून्य के बराबर हो जाता क्योकि इसमें प्रधान सदस्यों के साथ साथ ग्राम पंचायत सदस्यों के स्वतः प्रशिक्षण देने की विधिवत व्यस्था थी। यही नहीं ब्लॉक स्तर, पंचायत स्तर से हो लूट पर अंकुश लग  जाता।

कल्याण सिंह की सोच स्पष्ट थी कि ग्राम की इकाई हर परिवार है इसीलिए ग्राम पंचायत सचिवालय के माध्यम से एक एक परिवार को जागरूक करके उन्हें उनके अधिकार तथा कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा सकता है । कल्याण सिंह के मॉडल में जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख के चुनाव भी सीधे कराये जाने का प्रस्ताव भी तैयार था और अगर चुनाव सीधे जनता द्वारा होते तो जिला पंचाया अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख के पदों पर काबिज के लिए सदस्यों की खरीद-फरोख्त पर विराम लग जाता । दुर्भाग्य वश कल्याण सिंह के हटने के बाद कल्याण सिंह का पंचायती मॉडल  खत्म हो गया। 


योगी आदित्यनाथ को आज फिर महामारी के दौरान कल्याण सिंह मॉडल को ही अपनाना चाहिए जिसमे उन्होने गाव के विकास के लिए 29 विभागों के कर्मचारीयों और अधिकारियों को एक साथ जोड़कर त्रिस्त्रीय पंचायतों के आधीन किया था ग्राम पंचायतों में 29 विभागो से जुड़े हुये कार्य पंचायत सचिवालय के माध्यम से किया जाना था। कल्याण सिंह के इस मॉडल को वर्तमान व्यवस्था में योगी सरकार लागू करे तो उसे गांव के सर्वागीण विकास, कोरोना से लड़ाई लड़ने तथा भ्रष्टाचार पर पूर्ण विराम लगाने में सफलता हासिल हो सकती है। मुख्यमंत्री अपने आवास में ही बैठकर लखनऊ से ही ग्राम पंचायत सचिवालय के माध्यम से गाव के सर्वागीण  विकास की समीक्षा कर सकते है। यहाँ सबसे बड़ी उल्लेखनीय बात यह है कि कल्याण सिंह जब यह व्यवस्था लागू की थी तो उस समय ग्राम पंचायतों में बिजली पानी सड़क शौचालय तथा बैंक के खातों का बहुत कमी थी लेकिन आज ऐसा नहीं है। वर्तमान परिस्थितियों में कल्याण सिंह मॉडल को आज की आवश्यकतानुसार थोड़ा बदलाव करके विधिवत लागू किया जा सकता है जिसके लिए सबसे पहले त्रिस्तरतीय पंचायतों में प्रधान के साथ ग्राम पंचायत सदस्यों को भी महत्व देना होगा क्योकि वर्तमान व्यवस्था में ग्राम पॅचायत का मतलब प्रधान ही होता है।

इसका दुष्परिणाम 2021 मे हुये पंचायत चुनावों में देखने को भी मिला जिसमे 22000 ग्राम पंचायतों का विधिवत गठन इसलिए नहीं हो पाया कि सदस्यों के दो तिहाई का कोरम पूरा नहीं था। नियमानुसार ग्राम पंचायत गठन के लिए कुल सदस्यों का दो तिहाई सदस्य चुना जाना जरूरी है । लेकिन 22 हज़ार ग्राम पंचायतों में कोरम पूरा नहीं हुआ । इसके कारण मात्र 37000 ग्राम पंचायतों का विधिवत गठन हो पाया । इस घटना से यह सिद्ध हो गया है कि ग्राम पंचायतों में प्रधान ही सर्वे सर्वा बन कर लूट करता है । सदस्यों का मतलब शून्य है उनकी उपयोगिता केवल कोरम पूरा करने तक की है यह इसलिए हो रहा है कि 25 वर्षों में कल्याण सिंह को छोड़कर मुलायम सिंह यादव मायावती अखिलेश यादव  योगी आदित्यनाथ सभी ने इस पर ध्यान नहीं दिया। 

जिसके कारण चुनाव में ग्राम पंचायत सदस्य पद पर लड़ने के लिए उत्साह ही नहीं रह गया। आवश्यकता इसी बात की है कि प्रधान की तरह ही प्रत्येक ग्राम पंचायत सदस्य को प्रशिक्षित करके उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। योगी आदित्यनाथ जी अगर इस कार्य को करने में सफल हो जाते है तो इसका फायदा गाव के दलित पिछड़े महिला हर वर्ग के जीवान स्तर को सुधारने में बहुत सहायक होगा। क्योकि पिछले 25 वर्षों में आरक्षण की व्यवस्था लागू होने के बाद हर चुनाव में साढ़े तीन लाख से अधिक प्रतिनिधी दलित पिछड़े एवं महिलाए चुनी जाती हैं । अब अगर इन सदस्यों को प्रशिक्षित कर दिया गया तो गाव के हर परिवार में जागरूकता बढ़ेगी और कोरोना जैसे संकट से लड़ाई लड़ने में सफलता मिल सकती है । 


इस व्यवस्था में संसाधन और कर्मचारियों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में भवनों की कमी नहीं है केवल सरकार के इच्छाशक्ति की जरूरत है योगी आदित्यनाथ एक ईमानदार एवं मजबूत इच्छा शक्ति वाले नेता है वह अपने ही दल के मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह के फॉर्मूले को लागू करने में हिचकना नहीं चाहिए। ग्राम पंचायतों  में अगर जन प्रतिनिधी  प्रशिक्षित होते तो कोरोना संकट में जांच कराने, वैक्सीन लगवाने में बढ़ कर आगे आते। उन्हें गुमराह नहीं किया जा सकता। ग्राम सचिवालय की स्थापाना होने के साथ एक मजबूत लिंक गाव और मुख्यमंत्री सचिवालय की बीच सीधे बन जाएगा जिसका फायदा जनता को और राजनीतिक लाभ योगी आदित्यनाथ को भी मिलेगा । 
पूरे प्रदेश भर के सभी ग्राम पंचायते इंटरनेट कनैक्शन से जुड़ रही है। 18-20 घंटे बिजली आ रही है प्रत्येक परिवार को लाभकारी योजना लेने के लिए बैंक खाते खुले हैं। ऐसे में ग्राम पंचायत सचिवालय के विधिवत गठन से मुख्यमंत्री को दौरे  की जरूरत नहीं पड़ेगी और व्यवस्थाएं सुचारु रूप से चलेगी। ग्राम पंचायत में जब जारूकता आएगी तो क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत में हो रही लूट पर स्वतः ही धीरे धीरे अंकुश लग जाएगा क्योकि ग्राम पचयात सदस्यों की तरह क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्यों को कमेटियों मे स्थान मिलेगा और वह अपनी  भूमिका को मजबूती से निभा सकते है ।

मुख्यमात्री योगी आदित्यनाथ ने दौरा करके जमीनी हक़ीक़त जितना नौकरशाहों ने दिखाया है उतना देख लिया है लेकिन जो जमीनी हक़ीक़त योगी देख कर आए हैं उससे अलग ही है । क्योकि नौकरशाहों नें दौरे में सुव्यवस्थित तरीके से व्यवस्था बना कर मुख्यमंत्री के सामने परोस दिया है इसलिए योगी  आदित्यनाथ को नौकरशाहों के चंगुल से हट कर पंचायत में कल्याण सिंह मोडल अपनाये और  जन प्रतिनिधियों को महत्व दे और जनता को  जन प्रतिनिधियों के चश्मे से जमीने हकीकत को देखे तो निश्चित रूप से गांधी के ग्राम स्वराज का सपना पूरा हो जाएगा । समय कम है चुनौती अधिक है इसलिए कल्याण सिंह के मॉडल से जुड़ी हुई पुस्तकें उपलब्ध है शासनादेश उपलब्ध है । उसका अध्ययन करे । कल्याण सिंह से मार्ग दर्शन ले साथ ही वर्तमान आवश्यकतों को देखते हुये व्यापक स्तर पर चुने हुये प्रधान , ग्राम  पंचायत सदस्यों को व्यापक प्रशिक्षण दें ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *