कोविड-19 प्रबंधन हेतु गठित टीम-09 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा-निर्देश

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प्रदेश में कोरोना महामारी की स्थिति हर दिन के साथ और नियंत्रित होती जा रही है। वायरस अब कमज़ोर पड़ चुका है, लेकिन संक्रमण का खतरा अब भी बना हुआ है। बीते 24 घंटों में संक्रमण के 339 नए केस सामने आए, जबकि 1,116 लोग स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुए। इससे पहले, 21 मार्च को एक दिन में 500 से कम केस आये थे। वर्तमान में 8,101 केस एक्टिव हैं। प्रदेश में अब तक 05 करोड़ 36 लाख 02 हजार 870 कोविड टेस्ट किए जा चुके हैं। बीते 24 घंटों में 02 लाख 57 हजार 441 टेस्ट हुए और पॉजिटिविटी दर मात्र 0.1% रही, जबकि रिकवरी दर 98.2% हो गई है। कोरोना महामारी के बीच अब तक 16 लाख 72 हजार 968 प्रदेशवासी कोविड संक्रमण से मुक्त हो चुके हैं।

प्रदेश में कोविड टीकाकरण सुचारू रूप से चल रहा है। आज से रिक्शा-ऑटो चालक, रेहड़ी-पटरी व्यवसायी एवं फल-सब्जी विक्रेताओं के निःशुल्क टीकाकरण का विशेष अभियान शुरू हो रहा है। टीकाकरण कार्यक्रम का यह एक महत्वपूर्ण चरण है। अधिकाधिक लोग अपना टीकाकरण कराएं, इसके लिए जागरूकता प्रसार भी कराया जाए। अब तक प्रदेश में 02 करोड़ 30 लाख 02 हजार 546 डोज लगाई जा चुकी है। हमें अगले माह से प्रतिदिन 10-12 लाख वैक्सीन डोज लगाने के लक्ष्य के सापेक्ष तैयारी करनी होगी। कोल्ड चेन को व्यवस्थित रखते हुए इस संबंध में सभी जरूरी तैयारी समय से पूरी कर ली जाएं।

अवैध शराब के खिलाफ अभियान और तेज किया जाए। दुकानों का निरीक्षण करें। लाइसेंस का सत्यापन करें। अवैध शराब की गतिविधियों में संलिप्त लोगों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाए। 

● शस्त्र लाइसेंसों की समीक्षा की जाए। आपराधिक अथवा संदिग्ध गतिविधियों में संलिप्त लोगों के तथा गैरजरूरी मामलों में जारी लाइसेंस निरस्त करने की कार्यवाही हो। 

● कोरोना संक्रमण के कारण अनाथ बच्चों के बेहतर पालन-पोषण और शिक्षा-दीक्षा के प्रबंधन के लिए सरकार संकल्पित है। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना इसी दिशा में एक प्रयास है। कोई भी पात्र बच्चा इस योजना से वंचित न रहे, इस संबंध में संवेदनशीलता के साथ कार्य किया जाए। बाल संरक्षण गृहों की व्यवस्थाओं को और बेहतर करने के संबंध में विभागीय मंत्री और अधिकारीगण भौतिक निरीक्षण करते हुए आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित कराएं।

● स्मार्ट सिटी और अमृत योजना से जुड़े कार्यों में तेजी लाए जाने की जरूरत है। गुणवत्ता के साथ-साथ समयबद्धता पर भी ध्यान दिया जाए। इन योजनाओं की सतत समीक्षा भी की जाए।

● किसानों के हित संरक्षण को सुनिश्चित करते हुए गेहूं खरीद 15 जून के बाद भी जारी रखी जाए। बरसात शुरू हो गई है। कहीं भी गेहूं न भीगे, इसके लिए पर्याप्त इंतज़ाम किए जाएं।

● गौ-आश्रय स्थलों में गोवंश के लिए हरे चारे-भूसे की पर्याप्त व्यवस्था की जाए। जिलों में इन कार्यों के लिए वेटनरी अधिकारी की जवाबदेही तय की जाए। पशुओं की मृत्यु की दशा में अंत्येष्टि में देरी न हो।

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