बच्चों को दुग्धपान कराने वाली महिलाओं के लिये वर्क फ्राम होम

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सफलता की कहानी -38

केंद्र सरकार ने इस समय व्याप्त वैश्विक कोविड-19 महामारी के दौरान केंद्र ने छोटे बच्चों (दुग्धपान कराने वाली) वाली माताओं के लिए घर से काम करने को प्रोत्साहित करने के लिए एक नवीनतम कदम के रूप में मातृत्व लाभ (संशोधन) अधिनियम, 2017 की धारा 5(5) के तहत राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए परामर्श जारी किया है। इस अधिनियम में यह प्रावधान है कि जिन क्षेत्रों में किसी महिला को सौंपे गए कार्य की प्रकृति यदि इस प्रकार की है कि वह घर से काम कर सकती है तब नियोक्ता उसे आपसी सहमति के आधार पर इस अवधि में मातृत्व लाभ प्राप्त करने के बाद ऐसा करने की अनुमति दे सकता है।


कोविड महामारी के दौरान छोटे बच्चों (दुग्धपान कराने वाली ) वाली माताओं और उनके बच्चों की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए उन्हें कोरोना वायरस से संक्रमित होने से बचाने के लिए, श्रम और रोजगार मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को नियोक्ताओं को अनुमति देने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए एक सलाह जारी की है।

इस परामर्श के अनुसार जहां भी काम की प्रकृति अनुमति देती है, वहां ऐसी माताएं घर से काम करें। राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों से अनुरोध किया गया है कि महिला कर्मचारियों और नियोक्ताओं के बीच अधिनियम की धारा 5(5) के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों से यह भी अनुरोध किया गया है कि जहां कहीं भी घर से काम किया जाना सम्भव हो, मातृत्व लाभ (संशोधन) अधिनियम, 2017 की अधिनियम की धारा 5(5) के अनुसार अधिक से अधिक दुग्धपान कराने वाली माताओं को घर से काम करने की अनुमति देने के लिए उनके नियोक्ताओं को सलाह जारी की जा सकती है।

यह भी कहा गया है कि नियोक्ताओं को सलाह दी जा सकती है कि वे बच्चे के जन्म की तारीख से कम से कम एक वर्ष की अवधि के लिए ऐसी सभी माताओं के लिए घर से काम करने की अनुमति दें, जहां भी काम की प्रकृति ऐसा करने लिए सम्भव हो।


यह कदम इस कोविड महामारी के दौरान दुग्धपान कराने वाली माताओं को संक्रमित होने से बचाने के अलावा, जहां भी काम की प्रकृति ऐसा करने की अनुमति देती है, वहां घर से काम करने की सुविधा प्रदान करेगा और उनके रोजगार को बनाए रखने में सहायक होगा। इस प्रकार, श्रम शक्ति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने में एक सक्षम उपाय के रूप में इस अधिनियम के इस प्रावधान के कार्यान्वयन से एक खुशहाल श्रमशक्ति को बनाने में भी सहायता मिलेगी।

श्रीकांत श्रीवास्तव/सुन्दरम चौरसिया

सफलता की कहानी -37

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