नीरज चोपड़ा ने रचा इतिहास,भारत को दिलाया पहला गोल्ड

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टोक्यो, विद्या ज्ञान : टोक्यो ओलंपिक में देश को पहला गोल्ड मेडल दिलाने वाले नीरज चोपड़ा ने अपने शानदार प्रदर्शन से पूरे देश को ही नहीं दुनिया को रोमांचित कर दिया.टोक्यो ओलंपिक में भारत के जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा का नाम इतिहास के पन्नों पर स्वर्ण अक्षरों में लिखा जायेगा। नीरज ने 13 साल बाद ओलंपिक में भारत को गोल्ड मेडल दिलाया है। उन्होंने फाइनल राउंड में नंबर एक स्थान पर रहकर भाला फेंक स्पर्धा का स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
नीरज इसी के साथ ट्रैक एंड फील्ड इवेंट में भारत के लिए ओलंपिक में मेडल जीतने वाले पहले एथलीट बन गए हैं। इससे पहले भारत ने ओलंपिक इतिहास में कभी भी ट्रैक एंड फील्ड इवेंट में स्वर्ण पदक नहीं जीता था। भारत को इससे पहले 2008 के बीजिंग ओलंपिक में शूटर अभिनव बिंद्रा ने गोल्ड मेडल दिलाया था। उसके बाद आज नीरज चोपड़ा ने 13 साल के इंतजार को खत्म करते हुए भारत के लिए इतिहास रच दिया है।ओलंपिक के इतिहास में अब तक भारत को केवल 9 स्वर्ण पदक ही मिले थे और अब उन्होंने 10वां गोल्ड मेडल दिला दिया। जैवलिन थ्रो (भाला फेंक प्रतियोगिता) मेें उन्होंने 87.58 मीटर की थ्रो के साथ भारत की झोली में पहला गोल्ड मेडल डाल दिया।

दूसरे स्थान पर 86.67 मीटर के थ्रो के साथ याकूब वेडले और तीसरे स्थान पर 85.44 मीटर के थ्रो के साथ वी वेसले रहे। फाइनल राउंड में नीरज के आसपास भी कोई खिलाड़ी नहीं देखने को मिला। इस स्पर्धा के पहले थ्रो में नीरज ने जहां 87.3 मीटर तक थ्रो फेंक कर नंबर एक पोजीशन बना ली थी। वहीं दूसरे थ्रो में उन्होंने इससे भी ज्यादा 87.58 मीटर तक थ्रो फेंक कर अपनी स्वर्ण पदक की पकड़ को और मजबूत किया। हालांकि तीसरा थ्रो उनका खास नहीं रहा और चौथे अटेम्पट में उन्होंने फाउल कर दिया था।इसी के साथ भारत ने 2012 लंदन ओलंपिक को पीछे छोड़ते हुए टोक्यो ओलंपिक में अपना 7वां मेडल जीत लिया है। भारत ने लंदन ओलंपिक में 6 मेडल अपने नाम किए थे। ये ओलंपिक इतिहास में भारत का 10वां गोल्ड मेडल है। इससे पहले भारत ने 8 गोल्ड हॉकी में , एक शूटिंग (2008) और अब एक जैवलिन थ्रो में अपने नाम कर लिया है।
आपको जानकर हैरानी होगी नीरज चोपड़ा सेना में अधिकारी हैं और उन्होंने पहली बार ओलंपिक खेलों में हिस्सा लिया। वे किसान परिवार से आते हैं और उन्होंने अपनी मेहनत और संघर्ष के बल पर टोक्यो में भारत का तिरंगा सबसे ऊंचा किया। देश में क्रिकेटरों के अलावा अन्य खिलाडिय़ों को उतनी पहचान नहीं मिलती जितनी मिलनी चाहिये लेकिन नीरज चोपड़ा केवल 23 साल की आयु में इतिहास रचकर सभी युवाओं के लिये प्रेरणा बन गये।24 दिसंबर 1997 को हरियाणा के खांद्रा गांव में नीरज चोपड़ा का जन्म हुआ था। नीरज चोपड़ा गरीब किसान परिवार से आते हैं। 11 साल की उम्र में ही नीरज मोटापे का शिकार हो गए थे। उनका बढ़ता वजन देख घरवालों ने मोटापे को कम करने के लिए नीरज को खेल-कूद का सहारा लेने की सलाह दी।

जिसके बाद वो वजन कम करने के लिए पानीपत के शिवाजी स्टेडियम में जाने लगे। एक आम भारतीय लड़के की तरह उनकी भी पहली पसंद क्रिकेट ही था। लेकिन, स्टेडियम में जेवलिन थ्रो की प्रैक्टिस करने वाले खिलाडिय़ों को देखकर उनके मन में आया कि मैं इसे और दूर तक फेंक सकता हूं। यही से नीरज चोपड़ा के मन से क्रिकेट आउट हो गया और जेवलिन थ्रो ने एंट्री की।नीरज चोपड़ा अलग अलग प्रतियोगिताओं में पदक जीतते रहे हैं। 2016 में ही नीरज चोपड़ा ने आईआईएफ अंडर-20 वल्र्ड चैंम्पियनशिप में 86.48 मीटर दूर भाला फेंककर गोल्ड जीता था। 86.48 मीटर दूर जेवलिन थ्रो (भाला फेंक) कर नीरज ने अंडर-20 स्तर पर नया रिकॉर्ड भी बनाया था।इसके बाद उन्होंने 2018 के एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीता था। हालांकि, 2018 का सीजन खत्म होने से पहले हुई आईआईएफ डायमंड लीग में वो पोडियम फिनिश नहीं कर सके। अब नीरज के नाम एक और ऐतिहासिक उपलब्धि जुड़ गई है। नीरज ने 13 साल बाद टोक्यो ओलंपिक में भारत को इकलौता स्वर्ण पदक दिलाया।
हरियाणा के रहने वाले स्टार जेवलिन थ्रो ऐथलीट नीरज चोपड़ा ने शनिवार को तोक्यो ओलिंपिक में गोल्ड मेडल जीत इतिहास रच दिया। उनका सर्वश्रेष्ठ थ्रो 87.58 मीटर का रहा। यह ओलिंपिक में ट्रैक ऐंड फील्ड से भारत के लिए पहला मेडल है। यह भारत का तोक्यो में 7वां मेडल भी है। उधर, नीरज चोपड़ा के जीत का ऐलान होते ही हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने नाच कर जश्न मनाया। वहीं हरियाणा सरकार ने उन्हें 6 करोड़ रुपये और क्लास-1 की नौकरी देने क ऐलान किया है।

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